शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

आ अब लौट चले

ये जीत आसान जरुर है, लेकिन परिणाम स्वरुप पांच साल का कार्यकाल काफी चुनौती भरा है ! नितीश के पहले पांच साला के अपेछा इसबार लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई है! और बढे भी क्यूँ ना ! लोगों ने इसी आश पर तो एक बार फिर से बिहार की बागडोर एनडीए के हाथों में सौपीं है ! इस कार्यकाल में नितीश कुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार की सुविधा मुहैया करना है ! जो लोग खास कर युवा रोजी रोटी की तलाश में अपना घर बार छोड़कर बिहार से बहार जा चुके है, उनको भी मैंने ये कहते सुना है " आ अब लौट चले " ! विभिन्न क्षेत्रो में रोजगार के संभावनाओ को देखते हुए युवाओ में एक नई आश जगी है ! इसी अपेक्षा पर खड़ा उतरना मुख्यमंत्री नितीश कुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है ! पहले कार्यकाल में हुए अगड़ी जाति के लोगों की नाराजगी भी दूर करना एक टेढ़ी खीर है ! उद्योग और कल कारखाने लगाने के अलावा अच्छे और तकनिकी दृष्टिकोण से उत्तम शिक्षण संस्थानों की स्थापना भी राज्य के उतरोतर विकाश के लिए जरुरी है ! ताकि लोग यहीं शिक्षा ग्रहण करे और यहीं अपनी सेवा दे ! हालाँकि अक्सर देखा गया है की जो जीत आसानी से मिलती है उसका शुरूर जल्दी चढ़ता है ! नितीश जी आपके सिपहसालारों के लिए ये बातें आने वाले पांच सालों में खासा माएने रखेगी !

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