रविवार, 28 जून 2015

सफलता संसाधनो की मोहताज नहीं

 इंजीनियर बनना अब अमीरों और धन्ना सेठों की जागीर नहीं रही। गॉव से निकले युवा भी अब इंजीनियर बनने लगे है। पिछले कुछ सालो में ग्रामीण और गरीब युवाओ ने यह साबित किया है। एक मजदूर का बेटा बेटी इंजीनियर बनने के अपने सपने को पूरा कर रहा है। इन सपनो को पूरा करने में जहाँ उनकी लगन , मेहनत का कमल है , वहीं कुछ ऐसे संस्थान है जो उन्हें इंजीनियर बनने के रास्ते में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ।

एक वक्त था , जब इंजीनियर बनना गरीब घर के बच्चे सोच भी नहीं सकते थे। गांव की गलियों में गुल्ली  डंडा खेल कर बड़ा होने वाले बच्चे सपने में भी इंजीनियर बनने का सपना नहीं देखते थे। यही सोच कमोबेश अभिभावकों की भी थी।  धीरे धीर वक्त बदला और ग्रामीण बच्चो की सोच बदली। वो भी बड़े सपने देखने लगे। उन्हें भी अपने अन्दर की प्रतिभा को समझने और परखने का मौक़ा मिलने लगा।  उन्हें भी लगा की इंजीनियर बनने के लिए अमीर होना जरुरी नहीं है। कुछ जरुरी है, तो वो है कड़ी मेहनत और इमान्दारिता। क्योंकि इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए मोटे मोटे फीस वाले संस्थान की जगह अब काम फीस और मुफ्त में तैयारी कराने वाले संस्थान देेश में मौजूद है। बस जरुरी है, आप में वो प्रतिभा होनी चाहिए।

बिहार के गया जिले के मानपुर पटवा टोले के 18 युवाओ ने इसबार IIT  का एंट्रेंस पास किया है। इन लोगों की घर की सालाना कमाई 25000 से लेकर 90000 तक है। फिर भी इनलोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति को सफलता की राह में रोड़ा नहीं बनने दिया। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के दो भाइयों ने इंजीनिरिंग की परीक्षा पास की है। इनके पिता मिल में मजदूर है। ये मेधावी छात्रों साबित किया है की सफलता संसाधनो की मोहताज नहीं है। अगर लगन और कुछ करने की इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। इस बार के IIT एंट्रेंस का परिणाम देखेंगे तो ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जाएंगे।

अब बात करते है , उन संस्थानों की जो इनके सपने को पूरा करने कोई कसर नहीं छोड़ते है। मसलन पटना में आनद कुमार द्वारा चलाया जा रहा सुपर 30 संस्थान। धीरे धीरे ऐसे और कई संस्थान अब खुलने लगे है। ये कोचिंग सेन्र्टर प्रतिभावान गरीब बच्चों को कम फीस या मुफ्त में इन्हे एंट्रेंस की तैयारी कराते है। जिसके बाद ये बच्चे मिसाल कायम करते है, और बाकि बच्चों के लिए आदर्श बन रहे है। इसलिए कहते है, प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है।