शनिवार, 9 अप्रैल 2011

गांधीगिरी कितना कारगर


क्या अन्ना के शक्ल में गाँधी जी दीखते है ? क्या आज के युग में गांधीगिरी से बड़ी कोई ताकत नहीं है ? वर्त्तमान में जहाँ चारो तरफ हिंसा से अपनी बाते मनवाई जा रही है ऐसे में क्या भारत जैसे देश में अहिंसा सबसे बड़ी ताकत है ? ये चंद सवाल अभी कई लोग ढूंढ़ रहे है जबकि अभी भी भारत से भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए एक लम्बा रास्ता तय करना बाकि है ये तो बस एक शुरुआत है , अन्ना जी ऐसा कह रहे है आइये इन सवालोंके जवाब ढूंढे -------- सबसे पहली बात ------एक बहत्तर साल का बुढा आदमी सरकार को झुका के काले अंग्रेजो के चुंगल से इस देश को आजाद कराने के रह पर चल चूका है ये वही रास्ता है , जिसकी नींव गाँधी जी ने रखी थी , गोरे अंग्रजों को भागने के लिए वहां भी सफलता मिली थी यहाँ भी शुरूआती सफलता मिली है अगर सच कहा जय तो भ्रष्टाचार एक ऐसी गुलामी की बेडी है जिसके रहते इन्सान कभी आजाद नहीं हो सकता है दूसरी बात गाँधीगिरी की सरकार ने भ्रष्टचार ख़त्म करने के लिए कई कानून बनाये , लेकिन भ्रष्टाचार है जो टस से मस नहीं हुआ ये गांधीगिर है जो कम से कम उसे ख़त्म करने के लिए लोगो ने और सरकार के नुमैन्दे ने भी अपनी pratibadhta जताई है अरेबियन देश से लेकर खाडी मुल्कों में अभी एक प्रकार से जनजागरण अभियान छिड़ा है मगर इन मुल्कों में हिंसा के बल पर बदलाव लाया लाया जा रहा है , और कई जगहों पर लाया जा चूका है लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं है मैं मानता हूँ की हमारे देश में वैसी हालत भी नहीं है फिर भी क्या हमारे देश में लोग हिंसा से परिचित नहीं है लेकिन ये हमारा सौभाग्य है की गाँधी भारतीय थे उनके दिए उपदेश काश कोई लिब्या , सिरिया , यमन जैसे देशो में फैलाये इस लिए मैं कहता हु , की कौन कहता है कि गाँधी और गांधीगिरी आज के युग में प्रसंगीक नहीं है ये पहले भी प्रासंगिक था , आज भी है , और आगे भी रहेगा हमें गर्व होना चाहिए कि गाँधी जी भारत में पैदा हुए