बुधवार, 7 अगस्त 2013

कांग्रेसी भी आहत हुए होंगे !

 राजनीति करना तो राजनीतिक  दलो का पेशा है। चाहे यह राजनीति किसी की अर्थी पर ही क्यों न हो । पूंछ में शहीद हुए जाबांज सेना के शवों पर हमारे नेतागण अब एक दुसरे की कमी कमजोरी गिनाने लगे है । मंगलवार को संसद में रक्षामंत्री के बयान पर संसद के भीतर और बाहर महाभारत मचा  है । दरअसल रक्षामंत्री ए. के. एंटनी ने कहा था की पाकिस्तानी आर्मी के यूनिफार्म में आंतकवादियो ने भारतीय सेना की हत्या की है।  इस बयान कि आलोचना भाजपा सहित दुसरे दलों के नेताओ ने की। लेकिन इस सब के बिच कांग्रेसी नेता अजय माकन का बयान कांग्रेस की ओछी राजनीति का परिचायक है । बुधवार को अजय माकन ने कहा की राजग के शासन में कश्मीर में ज्यादा सेना के जवान मारे गए । निसंदेह अभी इस तरह की राजनीति हमारे नेताओ को शोभा नहीं देती । माना  की सोनिया गाँधी ने पार्टी प्रवक्ताओं को आक्रामक रुख अपनाने को कहा है । इसका यह मतलब नही की हर परिस्थिति को एक ही चश्मे से देखा जाय । मै दावे के साथ कहूँगा की अजय माकन के इस बयान से देशभक्त कांग्रेसी भी आहत हुए होंगे । 

गुरुवार, 1 अगस्त 2013

दिल मिले न मिले सवांद होते रहना चाहिए

सवांद में कमी शारीरिक नजदीकियों में भी एक दुरी का एहसास कराता है। और यही दूरिया बटवारे की दीवार खड़ी कर देती है । वो रिश्ता दो भाइयों का हो या फिर पति पत्नी का हो । दिल मिले न मिले सवांद आदान प्रदान होते रहना चाहिए । किसी भी रिश्ते को ऊंचाई तभी मिलती है जब रिश्तों में गर्माहट हो ।

आज कल की भागती दौडती जिन्दगी में कई घर ऐसे मिल जायेंगे  जंहा सब कुछ होते हुए भी इन्सान खुश नहीं है । यकीन मानिये इसकी बड़ी वजह घर के सदस्यों के बिच बात चित नहीं होना है । आखिर इन्सान क्यों अपने आप में सिमटता जा रहा है ? क्यों अपनी दुनिया इन मशीनों मसलन मोबाईल , कंप्यूटर , टैब , लैपटॉप  जैसे चीजो में उलझा कर के रखा है ? दोस्तों थोडा सा वक्त अपने और अपनों के लिए निकल कर देखो, सुकून मिलेगा । हर किसी को आपसे शिकायत नहीं होगी । आप लोगों के दिलो में राज करोगे । कम सुविधाओ में भी आराम की जिन्दगी जियोगो मेरे भाई ।                                                         
कहते है कि जब शीशे पर धुल की पहली परत जमे उसे उसी समय साफ कर लेना चाहिए । ज्यों ज्यों देर होगी वो परत मोटी  होती जाएगी । बाद में उसे साफ करने में ज्यादा मस्स्कत करनी पड़ेगी । हमारे रिश्ते भी कुछ इसी तरह के होते है । हमें कभी भी अपने अहंकार को रिश्तो के बिच नहीं आने देना चाहिए । अक्सर ये देखा गया है कि पहले आप तो पहले आप के चक्कर में बहुत रिश्ते टूट जाते है । मेरा तो ये मानना है कि अगर संबध कायम रखने के लिए हमें थोडा झुकना पड़े तो झुक जाना चाहिए ।मित्रों आप मानो या न मानो  कर के देखना । इसके लिए आप अपने आप को  धन्यवाद कहोगे । जो अपनी नजर में उठा रहता है , वो दुनिया की नजर में भी उठा रहता है, और जो अपनी नजर में गिर गया वो किसी की नजर में नहीं उठ सकता ।