सोमवार, 10 अगस्त 2015

सीमा पर बाड़ नहीं दीवार चाहिए


भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत लंबे समय तक अच्छे रिश्ते कभी नहीं रहे हैं । कुछ दिन या महिनों के बाद फिर कटू अनुभव भुगतने पड़ते है । एक अच्छे पड़ोसी के रूप में रखने और रहने की कल्पना मूर्त रूप ले नहीं पाती है । जब दोनों हुक्मरानों की राजनीतिक इच्छा शक्ति प्रबल होती है हम ढ़ाई घर चलते हैं । पर निकलता कुछ नहीं है । वहीं ढाक के तीन पात । सीज फायर का उल्लंघन या भारतीय सरजंमी पर आतंकी हमले होते ही हम अपने पॉंव फिर वापस खींच लेते हैं । तब हम अपने आपको पाते है कि हम आज भी वहीं है जहॉं 68 साल पहले खड़े थे । आखिर क्यों नहीं हम इन सात दशकों मे विवादित मुद्दो को सुलझा पाए है ? कभी भारत का हिस्सा रहा पाकिस्तान आए दिन आॅंखे दिखता रहता है ? वक्त बेवक्त गीदरभभकी देता रहता है । क्यों पाकिस्तान की जमीन पर रची साजिश का अंजाम हमे भूगतना पड़ता है ? क्यों तीन तीन महायुद्ध का परिणाम भूगतने वाला पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है ?

हर दूसरे दिन सीमा पर गोली बारी होना इत्तेफाक नहीं है। सीमा पार से घूसपैठ करकार भारत के उतरी भूभाग में अशांती फैलाना पाकिस्तान की फितरत है । दरअसल पकिस्तान नहीं चाहता है कि दोनों देश के रिश्ते सुधरे । इसलिए जैसे तैसे वह कश्मीर और आतंकवाद के मूद्दे को हवा देता रहता है । यह बात किसी से छुपी नहीं है, कि पाकिस्तान में नाम मात्र का लोकतंत्र है । वहॉं आज भी शासन की बागडोर सेना संभालती है । खास कर भारत के मामले में यह बात कई बार साफ हो चुकी है । मसलन , उफा मे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा किया गया वादा 48 घंटे में बदल गया । रूस के उफा में नवाज शरीफ ने पधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुंबई हमले के मास्टर माइंड लखवी के आवाज की सेंपल देने की बात कही थी , लेकिन पाकिस्तान की जमीन पर कदम रखते ही शरीफ साहब की शराफत बदल गई । नवाज शरीफ के सुर बदल गए । चौतरफा आलोचना होने के बाद नवाज शरीफ शांत बैठ गए । फिर क्या था,उसके बाद बांकि का काम पाकिस्तानी सेना और आतंकवादी कर ही रहे है । यही है पाकिस्तान की हकीकत ।

परमाणू संपन्न देश पाकिस्तान किसी मायने में अपने आप को भारत के कम नहीं आंकता है । हर बात पर परमाणू बम से लैस होने की धमकी देता रहता है । उसकी बड़ी वजह है कि हर युद्ध के बाद हमने उसे कोई ​बड़ा सबक नहीं सिखाया ।  ना तो हमने पाकिस्तानी जमीन हड़पी और ना ही उसके परमाणू ठिकानों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को नष्ट किया । दरअसल वह हर क्षेत्र मे भारत की बराबरी करना चाहता है । जो संभव नहीं है । यही वजह है कि पाकिस्तान भारत से जलता है । और यही तपन उसे साम्य संबध बनाने से रोकता है ।

लातों के देवता बातों से नहीं मानता । इन 68 सालों में इतना तो भारत को समझ लेना चाहिए । भारत पाकिस्ताना का मसला इतना आसान भी नहीं है जितना समझा जाता है । दरअसल दोनों देशों के बीच सेंटीमेंट का भी मसला जूड़ा है । आप टीवी पर दोनो तरफ के रक्षा विशेषज्ञों की बहस देख लिजिए । लगता है जैसे अब लड़ पड़ेगें । यह मसला हर भारतीय और पाकिस्तानी के दिलों को छूता है । ऐसे में जरूरी है कि पहले उन मसलों को सुलझाया जाय । जैसे जम्मू कश्मीर का मसला । फिर आंतकवाद का मुद्दा सुलझने वाला है। जब तक पाकिस्तानी सेना या वहॉं की हुकूमत जम्मू ​कश्मीर से अपना दावा करता रहेगा तब तक किसी भी सूरत में दोनों देश के संबध अच्छे नहीं हो सकते ।

मुॅंह​ में राम बगल में छूरी । पाकिस्तानियों का मूल मंत्र यही है । हम जब बात करते है , तो सिर्फ बात करते है । ताकि हम एक अच्छे पड़ोसी की तरह रह सकें । लेकिन पाकिस्तान जब बात करता है तब उसका ध्यान कहीं और रहता है । वह सिर्फ अंतराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए बात करता है । डायलॉग का दिखावा करता है । आज पाकिस्तान अपने अंदरूनी हालात से खुद लड़ रहा है । फिर भी सीमा पर लड़ाई करने के लिए आतुर है । इधर ​सीमा पर कुछ दिनों से जारी गोलीबारी इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान कश्मीर मूदृे को अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुख़ियों मे रखना चाहता है ।


पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार कठपूतली है । चाह कर भी वह भारत से अच्छे रिश्ते नहीं रख सकती है । क्योंकि उन्हें सेना और आइएसआई ऐसा नहीं करने देती है । उन्हें उच्छी तरह से पता है कि अगर ऐसा हो गया तो पाकिस्तान में उनकी ताक़त घट जाएगी । सेना , आईएसआई और सरकार की इसी टकराव की वजह है कि वहॉं आतंकवाद अपनी जड़े जमा चुका है । इसलिए भारत के ​​हित में यही होगा कि वह बातचीत छोड़कर चीन की तरह अपनी सीमाओं की ​दिवार इतनी उॅंची करले कि 'आ ना पाए उधर से दूश्मन कोई ' ।  

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