भारत और पाकिस्तान के बीच बहुत लंबे समय तक अच्छे रिश्ते कभी नहीं रहे हैं । कुछ दिन या महिनों के बाद फिर कटू अनुभव भुगतने पड़ते है । एक अच्छे पड़ोसी के रूप में रखने और रहने की कल्पना मूर्त रूप ले नहीं पाती है । जब दोनों हुक्मरानों की राजनीतिक इच्छा शक्ति प्रबल होती है हम ढ़ाई घर चलते हैं । पर निकलता कुछ नहीं है । वहीं ढाक के तीन पात । सीज फायर का उल्लंघन या भारतीय सरजंमी पर आतंकी हमले होते ही हम अपने पॉंव फिर वापस खींच लेते हैं । तब हम अपने आपको पाते है कि हम आज भी वहीं है जहॉं 68 साल पहले खड़े थे । आखिर क्यों नहीं हम इन सात दशकों मे विवादित मुद्दो को सुलझा पाए है ? कभी भारत का हिस्सा रहा पाकिस्तान आए दिन आॅंखे दिखता रहता है ? वक्त बेवक्त गीदरभभकी देता रहता है । क्यों पाकिस्तान की जमीन पर रची साजिश का अंजाम हमे भूगतना पड़ता है ? क्यों तीन तीन महायुद्ध का परिणाम भूगतने वाला पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है ?
हर दूसरे दिन सीमा पर गोली बारी होना इत्तेफाक नहीं है। सीमा पार से घूसपैठ करकार भारत के उतरी भूभाग में अशांती फैलाना पाकिस्तान की फितरत है । दरअसल पकिस्तान नहीं चाहता है कि दोनों देश के रिश्ते सुधरे । इसलिए जैसे तैसे वह कश्मीर और आतंकवाद के मूद्दे को हवा देता रहता है । यह बात किसी से छुपी नहीं है, कि पाकिस्तान में नाम मात्र का लोकतंत्र है । वहॉं आज भी शासन की बागडोर सेना संभालती है । खास कर भारत के मामले में यह बात कई बार साफ हो चुकी है । मसलन , उफा मे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा किया गया वादा 48 घंटे में बदल गया । रूस के उफा में नवाज शरीफ ने पधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुंबई हमले के मास्टर माइंड लखवी के आवाज की सेंपल देने की बात कही थी , लेकिन पाकिस्तान की जमीन पर कदम रखते ही शरीफ साहब की शराफत बदल गई । नवाज शरीफ के सुर बदल गए । चौतरफा आलोचना होने के बाद नवाज शरीफ शांत बैठ गए । फिर क्या था,उसके बाद बांकि का काम पाकिस्तानी सेना और आतंकवादी कर ही रहे है । यही है पाकिस्तान की हकीकत ।
परमाणू संपन्न देश पाकिस्तान किसी मायने में अपने आप को भारत के कम नहीं आंकता है । हर बात पर परमाणू बम से लैस होने की धमकी देता रहता है । उसकी बड़ी वजह है कि हर युद्ध के बाद हमने उसे कोई बड़ा सबक नहीं सिखाया । ना तो हमने पाकिस्तानी जमीन हड़पी और ना ही उसके परमाणू ठिकानों और प्रमुख प्रतिष्ठानों को नष्ट किया । दरअसल वह हर क्षेत्र मे भारत की बराबरी करना चाहता है । जो संभव नहीं है । यही वजह है कि पाकिस्तान भारत से जलता है । और यही तपन उसे साम्य संबध बनाने से रोकता है ।
लातों के देवता बातों से नहीं मानता । इन 68 सालों में इतना तो भारत को समझ लेना चाहिए । भारत पाकिस्ताना का मसला इतना आसान भी नहीं है जितना समझा जाता है । दरअसल दोनों देशों के बीच सेंटीमेंट का भी मसला जूड़ा है । आप टीवी पर दोनो तरफ के रक्षा विशेषज्ञों की बहस देख लिजिए । लगता है जैसे अब लड़ पड़ेगें । यह मसला हर भारतीय और पाकिस्तानी के दिलों को छूता है । ऐसे में जरूरी है कि पहले उन मसलों को सुलझाया जाय । जैसे जम्मू कश्मीर का मसला । फिर आंतकवाद का मुद्दा सुलझने वाला है। जब तक पाकिस्तानी सेना या वहॉं की हुकूमत जम्मू कश्मीर से अपना दावा करता रहेगा तब तक किसी भी सूरत में दोनों देश के संबध अच्छे नहीं हो सकते ।
मुॅंह में राम बगल में छूरी । पाकिस्तानियों का मूल मंत्र यही है । हम जब बात करते है , तो सिर्फ बात करते है । ताकि हम एक अच्छे पड़ोसी की तरह रह सकें । लेकिन पाकिस्तान जब बात करता है तब उसका ध्यान कहीं और रहता है । वह सिर्फ अंतराष्ट्रीय समुदाय को दिखाने के लिए बात करता है । डायलॉग का दिखावा करता है । आज पाकिस्तान अपने अंदरूनी हालात से खुद लड़ रहा है । फिर भी सीमा पर लड़ाई करने के लिए आतुर है । इधर सीमा पर कुछ दिनों से जारी गोलीबारी इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान कश्मीर मूदृे को अंतराष्ट्रीय स्तर पर सुख़ियों मे रखना चाहता है ।
पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार कठपूतली है । चाह कर भी वह भारत से अच्छे रिश्ते नहीं रख सकती है । क्योंकि उन्हें सेना और आइएसआई ऐसा नहीं करने देती है । उन्हें उच्छी तरह से पता है कि अगर ऐसा हो गया तो पाकिस्तान में उनकी ताक़त घट जाएगी । सेना , आईएसआई और सरकार की इसी टकराव की वजह है कि वहॉं आतंकवाद अपनी जड़े जमा चुका है । इसलिए भारत के हित में यही होगा कि वह बातचीत छोड़कर चीन की तरह अपनी सीमाओं की दिवार इतनी उॅंची करले कि 'आ ना पाए उधर से दूश्मन कोई ' ।
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