क्या रोती है आँखें ?
या फिर रोता है दिल !
किसके लिए निकलते हैं आंसू
क्यों बैचेन रहता है मन हमेशा
कोई बता दे की क्यों होता है ऐसा -२
एहसास क्या होती है
मालूम न था अबतक
सोचु मैं गर मिल जाये वो मुझसे
डरता हु खुद में गूम हो न जाऊ मैं खुद से -२
मिलना भी चाहते वो पर दूर से सही
जब भी मिले बस आँखें मिली
दिल मिलने की ख्वाहिस दिल में बाकि ही रही -२
जो भी कहा बंद होटों से ही कही
जितना भी कहा नापतोल कर कहा
कानो में जो गूंजती है हमेशा
पूछने पर वो कहते है
हमने तो कुछ कहा ही नहीं -२
शाम लिपटती है उनके यादो के चादर में
सुबह होती उनसे मिलने ख्वाहिस में
दिन कट जाता है उन्हें याद करके
रात निकल जाती है बस फ़रियाद करके -२
क्या आपको कुछ सच्चाई दिखती है हमरी बातो में
या फिर यही वो एहसास है
जिसे आप हम ढूढ़ते है
किसी के दिल की गहराईयो में -२
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